गुरुवार, 29 मार्च 2012

!! ये कैसा 'विशेषाधिकार' है ?!!

''विशेषाधिकारों'' का हनन पहले कभी इतनी बार नहीं हुआ! 
अब तो पब्लिक की बात-बात पर ''विशेषाधिकारों'' के हनन का शोर सुनाई देता है !
पब्लिक का बोलना भी अब तो जैसे 'उनके' ''विशेषाधिकारों'' का हनन करना हो गया है !
प्रतिदिन, अखबार का मुख पृष्ट मंत्रियों-संतरियों के घपलो-घोटालों में रंगा आ रहा है....! हजारों-लाखों करोड़ के घपलों के कीर्तिमान जिन महानुभावों ने बनाए हैं,वे कोई आम जनता में से निकले 'आम' लोग नहीं है,बल्कि लोकतंत्र  की 'सर्वोच्च संस्था' में बिराजे वी.आई.पी.महानुभाव ही है ! लेकिन तब उस संस्था की मर्यादा भंग नहीं हुई,और ना ही किसी के विशेषाधिकारों का हनन हुआ!!
बड़े-बड़े ओहदों पर बिराजे नेता जब एक-दुसरे पर चोरी-डकैती-बेईमानी-भ्रष्टाचार का इलज़ाम लगाते हैं तब भी  उस संस्था की मर्यादा भंग नहीं होती ,और ना ही किसी के ''विशेषाधिकारों'' का हनन होता है !! और तो और इन सर्वोच्च संस्थाओं में बैठ कर हाथापाई करते, बिलों को फाड़ कर फेंकते  ,नोटों की गड्डियों से 'वोट' खरीदते वक़्त भी उस संस्था की मर्यादा भंग नहीं होती ,और ना ही किसी के ''विशेषाधिकारों'' का हनन होता है !! लेकिन पब्लिक का एक आदमी अगर एक 'मुहावरे' का प्रयोग करदे,या कोई सच्चाई बयान करदे तो सर्वोच्च संस्था की ''मर्यादा'' भंग हो जाए........''विशेषाधिकारों'' का हनन हो जाए......!! 
''विशेषाधिकारों'' का आखिर ये कैसा खेल जिसमें,एक 'मुहावरे' पर सर्वोच्च संस्था में बिराजे सारे महानुभाव एक साथ पिल पड़ें,घंटों बहस करलें,और जनता को मुंह नहीं खोलने के लिए डराने के सारे हथकंडे आजमाने पर उतर जाए.......!! 
इतना समय,संगठित ताकत,और 'एकसूरी' बयानबाजी अगर ''जन लोकपाल बिल'' पर हुई होती तो ना तो कोई 'मुहावरे' का प्रयोग करता,ना ही 'महानुभावों' के लाखों-करोड़ के घपलों के लिए जनता को आंदोलित होना पड़ता....!!
लोकत्र में क्या ये अजीब सी बात नहीं है कि पब्लिक बस अपने प्रतिनिधि चुन भर लें,और फिर आँखे-कान और मुंह बंद कर पांच वर्षों तक बस उन्हें भुगतते रहें ! सेवा करने आये लोग मन माफिक मेवा खाते रहें,और पब्लिक बोले तो ''विशेषाधिकारों'' का डंडा दिखाते रहे.....!! अपने ''विशेषाधिकारों'' के लिए हर समय दुबले हुए जा रहे महानुभावों को चाहिए कि वे जनता को कोई ''विशेषाधिकार'' दे ना दे,कमसे कम उनके बोलने का 'अधिकार' तो ज़िंदा रहने दें......,क्योंकि डूब मरने के तो तमाम क्रिया-कलाप ''कुर्सी भक्तों' द्वारा अनवरत चालु ही है................!!! 
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